बुधवार, 20 दिसंबर 2017

इलाहाबाद के पार्क ~ मिंटो पार्क

Minto Park Prayagraj formerly Allahabad
शहरों में पार्क ही एक सार्वजनिक स्थल है जहा लोग सुबह में व्यायाम योग एवम इष्ट मित्र से अनौपचारिक मेल मिलाप करते है। लेकिन समय के साथ लोगो द्वारा अतिक्रमित और बहुत ही गंदा होता जा रहा है ।
नाम पट्टिका (हिंदी) ~मिंटो पार्क
नाम पट्टिका (अंग्रेजी) - मिनट पार्क
यह मिंटो पार्क जो प्रचलित नाम है वैसे इसका आधिकारिक नाम महामना मैदान मोहन मालवीय पार्क है । यह शहर के कीडगंज क्षेत्र में स्थित है । यह नए पुल से पूर्व एवम मुख्य द्वार तथा यमुना के उत्तर (अन्य द्वार) में है। इसके अंदर वन विभाग का कार्यालय है एवम जंगली पौधों की पौधशाला भी है। 
मुख्य द्वार (मिंटो पार्क)
अन्य द्वार ~आंतरिक (मिंटो पार्क)
 स्थापना और पार्क का इतिहास यह पर शिलापट्ट में उल्लिखित है जो निम्न है -


मैग्ना कार्टा - मिंटो पार्क

" ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की नीतियों के अत्यधिक विरोध के कारण भारत में स्वतंत्रता की मांग मुखर हुई जिसके फलस्वरूप भारत के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम 1857 या सैनिक विद्रोह का सूत्रपात हुआ। जिससे विवश होकर ब्रिटिश सरकार ने 1 नवम्बर 1858 को शाही उदघोषणा की गयी। इस उदघोषणा पत्र पर जिसे भारत का"मैग्ना कार्टा" भी कहा जाता है, लगभग 50 वर्षों तक विशेष ध्यान नही दिया गया तथा इस उदघोषणा में निहित सिद्धान्तों की भी अनदेखी की गई।

           सन 1911 में वायसराय लार्ड मिंटो के कार्यकाल में जिस स्थान पर महारानी विक्टोरिया की उदघोषणा पढ़ी गयी थी वहाँ पर स्तम्भ का निर्माण प्रस्तावित किया गया। इस स्तम्भ के चारो ओर एक पार्क का भी निर्माण भी लार्ड मिंटो के नाम पर 'मिंटो पार्क' भी प्रस्तावित किया गया, मिंटो पार्क का आधार शिला लार्ड मिंटो द्वारा रखी गयी तथा भारतीय मैग्ना कार्टा के प्रतीक के रूप में मिंटो पार्क का निर्माण हुआ। पार्क के अंदर ऐसे स्थान पर जहाँ सैकड़ों राजाओ एवम भारत वासियों के समक्ष विशाल दरबार मे उदघोषणा पत्र पढ़ा गया था, उदघोषणा स्तम्भ लगाए जाने का प्रस्ताव नवम्बर 1958 को महामना पण्डित मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में हुई बैठक में पारित हुआ। महामना पण्डित मदन मोहन मालवीय ने लोगो से पार्क एवम उदघोषणा स्तम्भ के निर्माण में सहायतार्थ अपील की फलस्वरूप विभिन्न महाराजाओ नवाबो तथा भारत के सम्माननीय नागरिको से 1,32,897 रु• का कोष प्राप्त किया। इस पार्क के प्रति महामना पं• मदन मोहन मालवीय के योगदान को देखते हुए मिंटो पार्क मेमोरियल कमेटी द्वारा सन 1977में इसका नाम मदन मोहन मालवीय पार्क रखा गया।"

पार्क का इतिहास -मिंटो पार्क
अशोक स्तंभ - उदघोषणा स्थल

उदघोषणा स्थल - मिंटो पार्क

शहर के अन्य पार्क की भांति यह भी निगम की ओर से हेय दृष्टि से देखे जाने की वजह से वन विभाग कार्यालय होने के कारण आने जाने योग्य था। परंतु वर्ष 2012 में क्षेत्र के विभिन्न संगठनों और पार्षद के कारण यह प्रशासन की दृष्टि में आया और इसके लिए भी निगम द्वारा सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू हुआ। यह पार्क सीसीटीवी कैमरों से सुसज्जित, स्वच्छ जल एवं शौचालय से परिपूर्ण है ।

सीसीटीव कैमरा
शौचालय-मिंटो पार्क
अगर आपको परिवार के साथ बाहर जाना है तो मिंटो पार्क सबसे अच्छा स्थल है क्योंकि इसके साथ ही आप श्री मनकामेश्वर भगवान का दर्शन कर सकते है एवम नए पुल के पास तथा पुल पर सेल्फी और आनंद ले सकते है । यह पार्क मानव जीवन के विभिन्न जरूरतों से परिपूर्ण है । अगर आप दौड़ या व्यायाम करना चाहते है तो सड़क एवम लॉन है। हाँ अगर आपको कुछ खाना है तो यह रेस्टोरेंट भी उपलब्ध है।
रेटोरेन्ट-मिंटो पार्क
पार्क में बच्चों के लिए वोटिंग झूले और अन्य साधन उपलब्ध है। पार्क में पर्यावरण संरक्षण एवं गंगा रक्षण के लिए जागरूकता बोर्ड लगाए गए है।



अगर आपको शहर के किसी भी अन्य स्थल के बारे में जानकारी चाहते है तो अपनी टिप्पणी में अवश्य लिखे ।
और अधिक पार्क के बारे में वीडियो देखें ।




शनिवार, 9 दिसंबर 2017

कर्ज़न सेतु @ मोतीलाल नेहरू सेतु इलाहाबाद

कर्ज़न सेतु @ मोतीलाल नेहरू सेतु पूर्वांचल को अवध से जोड़ने में सबसे सहायक सेतु था। यह आज 213 साल का जर्जर पुल है जिसमे आज भी दो पहिया का आवागमन है। यह इलाहाबाद का सबसे ऊंचा पुल इसीलिए स्काई-वाक कहा जाता है।

इस पुल में रेल एवम सड़क मार्ग दोनो है जिसमे ऊपरी सड़क तथा निचली सतह रेल मार्ग है।यह लोहे से निर्मित है ।इसका निर्माण लार्ड कर्ज़न ने 1904 में अवध को प्रयाग से जोड़ने के लिए किया था । आजादी के बाद 1948 में इसका नाम बदलकर मोतीलाल नेहरू सेतु कर दिया गया। 1998 में रेल मार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया   । सेतु से दाहिने रेल सेतु एवम बाये सड़क पुल स्थित है जिससे आवागमन हो रहा है।

रेल प्रशासन ने इसे तोड़ने के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू किया था लेकिन बुद्धिजीवियों के विरोध से यह राष्ट्रीय धरोहर के रूप में स्थापित करने का कार्य चल रहा है। इसको स्काई-वाक के रूप में संजोया जाएगा और सौदर्यीकरण कर आम जनता के लिए पर्यटन स्थल की तरह  प्रयोग होगा।

इसको जीवंत बनाने के लिए हॉल ही में एक फ़िल्म 'शादी में जरूर आना' जिसमे इसकर दृश्य को दिखाया गया है । इस फ़िल्म की एक गाने में इसको चित्रित किया गया है ।



इस फ़िल्म के Official Trailer में इसको दिखाया गया है। फ़िल्म के इस trailer के साथ ही लोगों की आवागमन और तेज हो गया है जिनको पता नही था वो लोग भी आकर्षित होने लगे है जिसमे खासकर प्रेमी युगल जो फिल्मो को देखकर वैसे ही सपने संजोते है। दुखद और नौजवानों के लिए एक संदेश भी कि दिवालो पर या फर्श पर अपने प्यार का इजहार और मनचले गंदे शब्दो को न लिखें।

भविष्य में इलाहाबाद संबंधित जानकारी के लिए इस पेज को suscribe अवश्य करे ।


सोमवार, 27 नवंबर 2017

ग्राम पंचायत में संचालित कार्यो को कैसे जाने ?

दोस्तो नमस्कार,
मैं आज एक महत्वपूर्ण विषय पर कुछ लिखने जा रहा हूँ। आप सभी को पता है पंचायत के तीन उपभाग ग्राम पंचायत , क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत है एवम उसमे सबसे अहम ग्राम पंचायत होता है।

ग्राम पंचायत में विभिन्न कार्य जैसे सड़क, नाली , आवास एवं तालाब संबंधित कार्य हमेशा होते रहते है । यह कार्य किस स्तर पर या कौन सा कार्य सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया या कौन सा कार्य पूर्ण हुआ सभी को जानने की इच्छा होती है।

अगर आप जानना चाहते है तो आपको कुछ नही करना बस एक क्लिक करने की जरूरत है और जानकारी प्राप्त कर सकते है।

या इस वीडियो में देख कर पता कर सकते है।



मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017

देव प्रबोधनी एकादशी /देवोत्थानी एकादशी (देव दीपावली ) ।

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर २६ हो जाती है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। कहीं-कहीं इस तिथि को 'पद्मनाभा' भी कहते हैं। सूर्य के मिथुन राशि में आने पर ये एकादशी आती है। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ माना जाता है। इस दिन से भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और फिर लगभग चार माह बाद तुला राशि में सूर्य के जाने पर उन्हें उठाया जाता है। उस दिन को " देवोत्थानी एकादशी " कहा जाता है। इस बीच के अंतराल को ही चातुर्मास कहा गया है।

भगवान विष्णु को जगाने का मंत्र :-

भगवान विष्णु को चार मास की योग-निद्रा से जगाने के लिए घण्टा ,शंख,मृदंग आदि वाद्यों की मांगलिक ध्वनि के बीचये श्लोक पढकर जगाते हैं-

उत्तिष्ठोत्तिष्ठगोविन्द त्यजनिद्रांजगत्पते।
 त्वयिसुप्तेजगन्नाथ जगत् सुप्तमिदंभवेत्॥
उत्तिष्ठोत्तिष्ठवाराह दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।हिरण्याक्षप्राणघातिन्त्रैलोक्येमङ्गलम्कुरु॥

व्रत और पूजा :-
 श्रीहरिको जगाने के पश्चात् उनकी षोडशोपचारविधि से पूजा करें। अनेक प्रकार के फलों के साथ नैवेद्य (भोग) निवेदित करें। संभव हो तो उपवास रखें अन्यथा केवल एक समय फलाहार ग्रहण करें। इस एकादशी में रातभर जागकर हरि नाम-संकीर्तन करने से भगवान विष्णु अत्यन्त प्रसन्न होते हैं। विवाहादिसमस्त मांगलिक कार्योके शुभारम्भ में संकल्प भगवान विष्णु को साक्षी मानकर किया जाता है। अतएव चातुर्मासमें प्रभावी प्रतिबंध देवोत्थान एकादशी के दिन समाप्त हो जाने से विवाहादि शुभ कार्य प्रारम्भ हो जाते हैं।


व्रत महात्म :-
पद्मपुराणके उत्तरखण्डमें वर्णित एकादशी-माहात्म्य के अनुसार श्री हरि-प्रबोधिनी (देवोत्थान) एकादशी का व्रत करने से एक हजार अश्वमेध यज्ञ तथा सौ राजसूय यज्ञों का फल मिलता है। इस परमपुण्यप्रदाएकादशी के विधिवत व्रत से सब पाप भस्म हो जाते हैं तथा व्रती मरणोपरान्त बैकुण्ठ जाता है। इस एकादशी के दिन भक्त श्रद्धा के साथ जो कुछ भी जप-तप, स्नान-दान, होम करते हैं,वह सब अक्षय फलदायक हो जाता है। देवोत्थान एकादशी के दिन व्रतोत्सवकरना प्रत्येक सनातनधर्मी का आध्यात्मिक कर्तव्य है।

शनिवार, 21 अक्टूबर 2017

क्या आत्महत्या ही अंतिम विकल्प है ??

अनुपम (काल्पनिक) बहुत  ही सरल, शांत एवम् सौम्य स्वभाव का एक नौजवान था। जीवन बहुत अच्छी तरह चल रही थी। घर में  सभी लोग थे जैसे मा, पिता जी,भाई,चाचा ,दादी ,दादी और पिता  की मां (माई) ।

अनुपम  ग्रामीण क्षेत्र से स्नातक के बाद अन्य स्नातक के लिए अपने शहर में चला गया । वहां भी उसने अन्य स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई अन्य विधाओं में किया । एक मध्यम एवं संभ्रांत परिवार में पला-बढ़ा जिसको बाल्यावस्था में कभी  किसी  ने पैसे कमाने या छल-प्रपंच की शिक्षा नहीं मिली थी। जीवन के साथ उम्र बढ़ता गया और इसी बीच दादा (बड़े पिता जी)  की मृत्यु से वह बहुत आहत हुआ। अनुपम जिज्ञासु एवम् साधक प्रवृत्ति होने के कारण आज भी शिक्षा के मोहमाया से बाहर नहीं निकल पा रहा था  कि घर वालों ने शादी जैसे अटूट बंधन में बंध दिया । बिना पैसे के जिम्मेदारी या जिम्मेदार होना दोनों असंभव है और लाख अनुपम के माना करने पर भी घरवालों ने शादी के बंधन में बांध दिया । अनुपम शादी ना कर सम्पूर्ण जीवन शिक्षा एवम् समाज कार्य में सौंपना चाहता था परन्तु घर वालों के प्रपंच से वह बच ना सका । अनुपम को समाज और शिक्षा से महत्वपूर्ण नौकरी का अहसास हुआ लेकिन भ्रष्टाचार और शारीरिक अक्षमता के कारण कोई सफलता ना मिली और इसी बीच वह एक संतान का पिता भी बन गया। अब जिम्मेदारियां बढ़ गयी लेकिन वह कुछ करने में असमर्थ था । शारीरिक अक्षमता के कारण वह किसी कंपनी या शारीरिक श्रम का कार्य करने में असमर्थ समझने के कारण कुछ व्यवसाय के लिए सोचने लगा लेकिन  वह यह बात अपने पिता  से नहीं कह सकता था क्योंकि उसके पिता पूर्वाग्रही थे जिन्हें हर एक कार्य में वही दिखता था  कोई भी व्यक्ति कुछ करने के पहले नहीं सोचता यथा - बाहर ना निकलो अन्यथा दुर्घटना हो  जाएगी , व्यवसाय नहीं करो नही खेत बेच दोगे  ।।

अनुपम के पिता में बहुत गुण जैसे सामाजिकता, परिवारवाद ,बहन, भाई और माता -पिता सबके भले की बात लेकिन वह कभी अपने बच्चों  को समझ नहीं पाए । अनुपम भी अपने मां को कभी इतना बड़ा दुख नहीं देना चाहता था लेकिन शायद जीवन से हार मान चुका था और एक दिन वह पत्नी और अपनी छोटी बच्ची के साथ अप्राकृतिक रूप यानी आत्महत्या कर लिया । वह अपनी पत्नी बच्चो को इस क्रूर दुनिया में कष्ट के जीवन न मिले इसलिए पहले मासूम को जहर पिलाया और फिर पत्नी को और पत्नी - बच्ची को पूर्ण मृत्यु देने के पश्चात खुद भी कल के गाल में समा गया ।

बुधवार, 30 अगस्त 2017

वीर शहीदों को नमन...

जिसका मुकुट हिमालय ,
पैरो को धोता सागर ।
विश्व-गुरु जो मार्ग दिखाए ,
खतरे में है उसका आँचल ।।


हत्यारा गजनी ने लुटा ,
भारत माँ के गहनों को ।
देश में बैठे जयचंदो ने ,
बेच दिया अस्मत मुगलो को ।।


व्यापारी बन आये इंग्लिश ,
पुर्त और फ्रांसीसी आये ।
पीठ में छुरा घोप हमारे,
कर दिया देश परतंत्र ।।


वीर शहीद जवानों ने,
आजादी के मतवालो ने ।
खून से सींचा आँचल माँ के ,
कर दिया देश स्वतंत्र ।।

द्वारा- अनुराग मिश्र

भारत का इतिहास बहुत ही कम शब्दों में
वीर शहीदों को नमन - जय हिंद
देश मे कितने आततायी अंग्रेज आये लेकिन भारत के संप्रभुता अखंडता को कुछ कर नही पाए। देश के शहीदों ने अपनी बलिदानी देकर देश को सुरक्षित किया। जय हिंद


यह स्वरचित रचना 15 अगस्त 2015 को लिखा था । भारत के इतिहास को कुछ चंद पंक्तियों में लिखने का एक छोटा प्रयास है। अगर समझ आ जाये तो शहीदों के नाम एक जय हिंद अवश्य लिखे।

जय हिंद ।।

शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

एक परिचय - आज की महिला

मित्रो मै एक छोटा प्रयास कर रहा हूँ , शायद कोई त्रुटि या भरी शब्द मिले तो .....माफ करना । इसी आशा और विश्वास के साथ मै अपनी बात शुरू करता हूँ। महिला , स्त्री , नारी और अंग्रेजी में " woman " मानव संस्कृति की एक महत्वपूर्ण अंग है । एक स्त्री को हम कई रूपों में जैसे की एक स्त्री - माँ के रूप में , बहन के रूप में , पत्नी के रूप में देख सकते है


"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता "
जहाँ नारी का सम्मान होता है वह सुख और समृधि का वास होता है , ऐसा हमारे पवित्र ग्रंथो कहा गया है नारी को देवी का प्रतीक भी मानते है

आज अख़बार और समाचार में सभी जगहों पर एक सबसे विशिष्ठ खबर होती है -
१. महिला अपने बच्चे के साथ खुदखुशी की ,(जली या नौवी माजिले से कूदी कर जान दी )
२. महिला के साथ सामूहिक बलात्कार या बलात्कार करने का प्रयास
३. दहेज़ के भूख की आग में जली " सीमा , सुधा और पता नही कितनी
४. माँ के कोख में भी नहीं बक्शा जा रहा है
ऐसी स्थिति हो गयी है , कि देश का ,समाज का पतन सुनिश्चित हो गया है आखिर वो भो तो किसी कि बहु ,बेटी और माँ होती है क्षमा करियेगा अधिक बलात्कार के मामलों में बलात्कारी समाज का नेता ,उसका कोई परिजन/ नजदीकी रिश्तेदार या बड़े पुलिस अधिकारी ( उनके परिजन) होते है जो कि समाज के रक्षक माने जाते है और खुद को साबित करने की फिराक में रहते है

कही से मुझे प्राप्त ये पंक्तिया बता रही है कि नारी के क्या रूप हो सकते है , माँ , बहु , बेटी या बहन होने के साथ साथ -

"तुमही दुर्गा, तुमही काली, तुम्हरी महिमा बड़ी निराली
तुमही गीता ,तुमही सीता , तुमसे मर्द न कउनउ जीता
तुम ही से घर मथुरा काशी , तुमही घर कि सत्यानाशी "

ज्यादा मै कुछ नही कहूँगा , यदि कुछ दिनों तक यही चलता रहा तो यही सीता और गीता ...दुर्गा और काली का रूप धारण कर लेगी और मथुरा काशी को छोड़ कर सत्यानाश का जो तांडव प्रस्तुत करेगी कि सम्पूर्ण सृष्टी का विनाश हो जायेगा


आप सभी मित्रो से, भाइयो से , बहनों से और माताओ से आखिर कब तक !!! अपने विचार कमेन्ट बॉक्स में अवश्य लिखे ।