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रविवार, 27 मार्च 2022

बाबा बदेवरा नाथ मंदिर , जिगना मीरजापुर

 ॐ श्री बदेवरा नाथ महादेव की जय निर्जापुर जिले में जिगना के बड़ेवरा ग्राम में प्रचीन और भव्य मन्दिर क्षेत्रवासियों पर सदैव कृपा बरसाते है । यहाँव में मारा में श्रद्धालुओं और तिथियों में भरी जुटती है । वैसे तो प्रत्येक तेरस के दिन यहाँ मेला लगता है परन्तु श्रावण मास से अधिक मास और पुरुषोत्तम मास में यहां श्रद्धालु विशेष रूप से जलाभिषेक और दर्शन करने आते है ।मेला के दिन 2km क्षेत्र में फैले मेले में घरेलू उपयोग के सूप , चलनी , मुसल , बेलन , डलिया, दउरी सहित बाँस और काढ के सामानों की खरीदारी होती है । बिसारती समान और खिलौनों की दुकानों पर काफी चहल पहल रहती है

 

बदेवरा नाथ मन्दिर
Badewara Nath Temple

बाबा बदेवरा नाथ
Baba Badewara Nath

बदेवरा नाथ मन्दिर के बारे में मान्यता है कि इसके पास में स्थित तालाब में स्नान करने से गठिया, बतास जैसे रोगों से मुक्ति मिलती है । 

स्थापना की बात करें तो प्रयाग रामलीला स्मारिका के मुताबिक शिव नागराज वीर सेन ने कुणालों से युद्ध किया था और मथुरा तके उसके राज्य को जीत लिया था । युद्ध में उनके से जहाँ वीरगति प्राप्ति की भी वहां शिवलिंग स्थापित किए गए । ये स्थान है इलाहाबाद का महुआव, मिर्ज़ापुर का बदेवरा नाथ और भदोही के सेमराधनाथ , जहाँ पर शिवलिंग स्थापित किए गए थे ।

यहाँ पहुचने के लिए सड़क मार्ग से जिगना बस स्टैंड से लगभग 6-7 किमी. पर स्थित है । जिगना रेलवे स्टेशन लेकिन यहां पर लोकल ट्रेन ही रुकती है ।

 


बुधवार, 20 दिसंबर 2017

इलाहाबाद के पार्क ~ मिंटो पार्क

Minto Park Prayagraj formerly Allahabad
शहरों में पार्क ही एक सार्वजनिक स्थल है जहा लोग सुबह में व्यायाम योग एवम इष्ट मित्र से अनौपचारिक मेल मिलाप करते है। लेकिन समय के साथ लोगो द्वारा अतिक्रमित और बहुत ही गंदा होता जा रहा है ।
नाम पट्टिका (हिंदी) ~मिंटो पार्क
नाम पट्टिका (अंग्रेजी) - मिनट पार्क
यह मिंटो पार्क जो प्रचलित नाम है वैसे इसका आधिकारिक नाम महामना मैदान मोहन मालवीय पार्क है । यह शहर के कीडगंज क्षेत्र में स्थित है । यह नए पुल से पूर्व एवम मुख्य द्वार तथा यमुना के उत्तर (अन्य द्वार) में है। इसके अंदर वन विभाग का कार्यालय है एवम जंगली पौधों की पौधशाला भी है। 
मुख्य द्वार (मिंटो पार्क)
अन्य द्वार ~आंतरिक (मिंटो पार्क)
 स्थापना और पार्क का इतिहास यह पर शिलापट्ट में उल्लिखित है जो निम्न है -


मैग्ना कार्टा - मिंटो पार्क

" ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की नीतियों के अत्यधिक विरोध के कारण भारत में स्वतंत्रता की मांग मुखर हुई जिसके फलस्वरूप भारत के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम 1857 या सैनिक विद्रोह का सूत्रपात हुआ। जिससे विवश होकर ब्रिटिश सरकार ने 1 नवम्बर 1858 को शाही उदघोषणा की गयी। इस उदघोषणा पत्र पर जिसे भारत का"मैग्ना कार्टा" भी कहा जाता है, लगभग 50 वर्षों तक विशेष ध्यान नही दिया गया तथा इस उदघोषणा में निहित सिद्धान्तों की भी अनदेखी की गई।

           सन 1911 में वायसराय लार्ड मिंटो के कार्यकाल में जिस स्थान पर महारानी विक्टोरिया की उदघोषणा पढ़ी गयी थी वहाँ पर स्तम्भ का निर्माण प्रस्तावित किया गया। इस स्तम्भ के चारो ओर एक पार्क का भी निर्माण भी लार्ड मिंटो के नाम पर 'मिंटो पार्क' भी प्रस्तावित किया गया, मिंटो पार्क का आधार शिला लार्ड मिंटो द्वारा रखी गयी तथा भारतीय मैग्ना कार्टा के प्रतीक के रूप में मिंटो पार्क का निर्माण हुआ। पार्क के अंदर ऐसे स्थान पर जहाँ सैकड़ों राजाओ एवम भारत वासियों के समक्ष विशाल दरबार मे उदघोषणा पत्र पढ़ा गया था, उदघोषणा स्तम्भ लगाए जाने का प्रस्ताव नवम्बर 1958 को महामना पण्डित मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में हुई बैठक में पारित हुआ। महामना पण्डित मदन मोहन मालवीय ने लोगो से पार्क एवम उदघोषणा स्तम्भ के निर्माण में सहायतार्थ अपील की फलस्वरूप विभिन्न महाराजाओ नवाबो तथा भारत के सम्माननीय नागरिको से 1,32,897 रु• का कोष प्राप्त किया। इस पार्क के प्रति महामना पं• मदन मोहन मालवीय के योगदान को देखते हुए मिंटो पार्क मेमोरियल कमेटी द्वारा सन 1977में इसका नाम मदन मोहन मालवीय पार्क रखा गया।"

पार्क का इतिहास -मिंटो पार्क
अशोक स्तंभ - उदघोषणा स्थल

उदघोषणा स्थल - मिंटो पार्क

शहर के अन्य पार्क की भांति यह भी निगम की ओर से हेय दृष्टि से देखे जाने की वजह से वन विभाग कार्यालय होने के कारण आने जाने योग्य था। परंतु वर्ष 2012 में क्षेत्र के विभिन्न संगठनों और पार्षद के कारण यह प्रशासन की दृष्टि में आया और इसके लिए भी निगम द्वारा सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू हुआ। यह पार्क सीसीटीवी कैमरों से सुसज्जित, स्वच्छ जल एवं शौचालय से परिपूर्ण है ।

सीसीटीव कैमरा
शौचालय-मिंटो पार्क
अगर आपको परिवार के साथ बाहर जाना है तो मिंटो पार्क सबसे अच्छा स्थल है क्योंकि इसके साथ ही आप श्री मनकामेश्वर भगवान का दर्शन कर सकते है एवम नए पुल के पास तथा पुल पर सेल्फी और आनंद ले सकते है । यह पार्क मानव जीवन के विभिन्न जरूरतों से परिपूर्ण है । अगर आप दौड़ या व्यायाम करना चाहते है तो सड़क एवम लॉन है। हाँ अगर आपको कुछ खाना है तो यह रेस्टोरेंट भी उपलब्ध है।
रेटोरेन्ट-मिंटो पार्क
पार्क में बच्चों के लिए वोटिंग झूले और अन्य साधन उपलब्ध है। पार्क में पर्यावरण संरक्षण एवं गंगा रक्षण के लिए जागरूकता बोर्ड लगाए गए है।



अगर आपको शहर के किसी भी अन्य स्थल के बारे में जानकारी चाहते है तो अपनी टिप्पणी में अवश्य लिखे ।
और अधिक पार्क के बारे में वीडियो देखें ।




शनिवार, 9 दिसंबर 2017

कर्ज़न सेतु @ मोतीलाल नेहरू सेतु इलाहाबाद

कर्ज़न सेतु @ मोतीलाल नेहरू सेतु पूर्वांचल को अवध से जोड़ने में सबसे सहायक सेतु था। यह आज 213 साल का जर्जर पुल है जिसमे आज भी दो पहिया का आवागमन है। यह इलाहाबाद का सबसे ऊंचा पुल इसीलिए स्काई-वाक कहा जाता है।

इस पुल में रेल एवम सड़क मार्ग दोनो है जिसमे ऊपरी सड़क तथा निचली सतह रेल मार्ग है।यह लोहे से निर्मित है ।इसका निर्माण लार्ड कर्ज़न ने 1904 में अवध को प्रयाग से जोड़ने के लिए किया था । आजादी के बाद 1948 में इसका नाम बदलकर मोतीलाल नेहरू सेतु कर दिया गया। 1998 में रेल मार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया   । सेतु से दाहिने रेल सेतु एवम बाये सड़क पुल स्थित है जिससे आवागमन हो रहा है।

रेल प्रशासन ने इसे तोड़ने के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू किया था लेकिन बुद्धिजीवियों के विरोध से यह राष्ट्रीय धरोहर के रूप में स्थापित करने का कार्य चल रहा है। इसको स्काई-वाक के रूप में संजोया जाएगा और सौदर्यीकरण कर आम जनता के लिए पर्यटन स्थल की तरह  प्रयोग होगा।

इसको जीवंत बनाने के लिए हॉल ही में एक फ़िल्म 'शादी में जरूर आना' जिसमे इसकर दृश्य को दिखाया गया है । इस फ़िल्म की एक गाने में इसको चित्रित किया गया है ।



इस फ़िल्म के Official Trailer में इसको दिखाया गया है। फ़िल्म के इस trailer के साथ ही लोगों की आवागमन और तेज हो गया है जिनको पता नही था वो लोग भी आकर्षित होने लगे है जिसमे खासकर प्रेमी युगल जो फिल्मो को देखकर वैसे ही सपने संजोते है। दुखद और नौजवानों के लिए एक संदेश भी कि दिवालो पर या फर्श पर अपने प्यार का इजहार और मनचले गंदे शब्दो को न लिखें।

भविष्य में इलाहाबाद संबंधित जानकारी के लिए इस पेज को suscribe अवश्य करे ।


सोमवार, 27 नवंबर 2017

ग्राम पंचायत में संचालित कार्यो को कैसे जाने ?

दोस्तो नमस्कार,
मैं आज एक महत्वपूर्ण विषय पर कुछ लिखने जा रहा हूँ। आप सभी को पता है पंचायत के तीन उपभाग ग्राम पंचायत , क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत है एवम उसमे सबसे अहम ग्राम पंचायत होता है।

ग्राम पंचायत में विभिन्न कार्य जैसे सड़क, नाली , आवास एवं तालाब संबंधित कार्य हमेशा होते रहते है । यह कार्य किस स्तर पर या कौन सा कार्य सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया या कौन सा कार्य पूर्ण हुआ सभी को जानने की इच्छा होती है।

अगर आप जानना चाहते है तो आपको कुछ नही करना बस एक क्लिक करने की जरूरत है और जानकारी प्राप्त कर सकते है।

या इस वीडियो में देख कर पता कर सकते है।



मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017

देव प्रबोधनी एकादशी /देवोत्थानी एकादशी (देव दीपावली ) ।

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर २६ हो जाती है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। कहीं-कहीं इस तिथि को 'पद्मनाभा' भी कहते हैं। सूर्य के मिथुन राशि में आने पर ये एकादशी आती है। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ माना जाता है। इस दिन से भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और फिर लगभग चार माह बाद तुला राशि में सूर्य के जाने पर उन्हें उठाया जाता है। उस दिन को " देवोत्थानी एकादशी " कहा जाता है। इस बीच के अंतराल को ही चातुर्मास कहा गया है।

भगवान विष्णु को जगाने का मंत्र :-

भगवान विष्णु को चार मास की योग-निद्रा से जगाने के लिए घण्टा ,शंख,मृदंग आदि वाद्यों की मांगलिक ध्वनि के बीचये श्लोक पढकर जगाते हैं-

उत्तिष्ठोत्तिष्ठगोविन्द त्यजनिद्रांजगत्पते।
 त्वयिसुप्तेजगन्नाथ जगत् सुप्तमिदंभवेत्॥
उत्तिष्ठोत्तिष्ठवाराह दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।हिरण्याक्षप्राणघातिन्त्रैलोक्येमङ्गलम्कुरु॥

व्रत और पूजा :-
 श्रीहरिको जगाने के पश्चात् उनकी षोडशोपचारविधि से पूजा करें। अनेक प्रकार के फलों के साथ नैवेद्य (भोग) निवेदित करें। संभव हो तो उपवास रखें अन्यथा केवल एक समय फलाहार ग्रहण करें। इस एकादशी में रातभर जागकर हरि नाम-संकीर्तन करने से भगवान विष्णु अत्यन्त प्रसन्न होते हैं। विवाहादिसमस्त मांगलिक कार्योके शुभारम्भ में संकल्प भगवान विष्णु को साक्षी मानकर किया जाता है। अतएव चातुर्मासमें प्रभावी प्रतिबंध देवोत्थान एकादशी के दिन समाप्त हो जाने से विवाहादि शुभ कार्य प्रारम्भ हो जाते हैं।


व्रत महात्म :-
पद्मपुराणके उत्तरखण्डमें वर्णित एकादशी-माहात्म्य के अनुसार श्री हरि-प्रबोधिनी (देवोत्थान) एकादशी का व्रत करने से एक हजार अश्वमेध यज्ञ तथा सौ राजसूय यज्ञों का फल मिलता है। इस परमपुण्यप्रदाएकादशी के विधिवत व्रत से सब पाप भस्म हो जाते हैं तथा व्रती मरणोपरान्त बैकुण्ठ जाता है। इस एकादशी के दिन भक्त श्रद्धा के साथ जो कुछ भी जप-तप, स्नान-दान, होम करते हैं,वह सब अक्षय फलदायक हो जाता है। देवोत्थान एकादशी के दिन व्रतोत्सवकरना प्रत्येक सनातनधर्मी का आध्यात्मिक कर्तव्य है।

शनिवार, 21 अक्टूबर 2017

क्या आत्महत्या ही अंतिम विकल्प है ??

अनुपम (काल्पनिक) बहुत  ही सरल, शांत एवम् सौम्य स्वभाव का एक नौजवान था। जीवन बहुत अच्छी तरह चल रही थी। घर में  सभी लोग थे जैसे मा, पिता जी,भाई,चाचा ,दादी ,दादी और पिता  की मां (माई) ।

अनुपम  ग्रामीण क्षेत्र से स्नातक के बाद अन्य स्नातक के लिए अपने शहर में चला गया । वहां भी उसने अन्य स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई अन्य विधाओं में किया । एक मध्यम एवं संभ्रांत परिवार में पला-बढ़ा जिसको बाल्यावस्था में कभी  किसी  ने पैसे कमाने या छल-प्रपंच की शिक्षा नहीं मिली थी। जीवन के साथ उम्र बढ़ता गया और इसी बीच दादा (बड़े पिता जी)  की मृत्यु से वह बहुत आहत हुआ। अनुपम जिज्ञासु एवम् साधक प्रवृत्ति होने के कारण आज भी शिक्षा के मोहमाया से बाहर नहीं निकल पा रहा था  कि घर वालों ने शादी जैसे अटूट बंधन में बंध दिया । बिना पैसे के जिम्मेदारी या जिम्मेदार होना दोनों असंभव है और लाख अनुपम के माना करने पर भी घरवालों ने शादी के बंधन में बांध दिया । अनुपम शादी ना कर सम्पूर्ण जीवन शिक्षा एवम् समाज कार्य में सौंपना चाहता था परन्तु घर वालों के प्रपंच से वह बच ना सका । अनुपम को समाज और शिक्षा से महत्वपूर्ण नौकरी का अहसास हुआ लेकिन भ्रष्टाचार और शारीरिक अक्षमता के कारण कोई सफलता ना मिली और इसी बीच वह एक संतान का पिता भी बन गया। अब जिम्मेदारियां बढ़ गयी लेकिन वह कुछ करने में असमर्थ था । शारीरिक अक्षमता के कारण वह किसी कंपनी या शारीरिक श्रम का कार्य करने में असमर्थ समझने के कारण कुछ व्यवसाय के लिए सोचने लगा लेकिन  वह यह बात अपने पिता  से नहीं कह सकता था क्योंकि उसके पिता पूर्वाग्रही थे जिन्हें हर एक कार्य में वही दिखता था  कोई भी व्यक्ति कुछ करने के पहले नहीं सोचता यथा - बाहर ना निकलो अन्यथा दुर्घटना हो  जाएगी , व्यवसाय नहीं करो नही खेत बेच दोगे  ।।

अनुपम के पिता में बहुत गुण जैसे सामाजिकता, परिवारवाद ,बहन, भाई और माता -पिता सबके भले की बात लेकिन वह कभी अपने बच्चों  को समझ नहीं पाए । अनुपम भी अपने मां को कभी इतना बड़ा दुख नहीं देना चाहता था लेकिन शायद जीवन से हार मान चुका था और एक दिन वह पत्नी और अपनी छोटी बच्ची के साथ अप्राकृतिक रूप यानी आत्महत्या कर लिया । वह अपनी पत्नी बच्चो को इस क्रूर दुनिया में कष्ट के जीवन न मिले इसलिए पहले मासूम को जहर पिलाया और फिर पत्नी को और पत्नी - बच्ची को पूर्ण मृत्यु देने के पश्चात खुद भी कल के गाल में समा गया ।

बुधवार, 30 अगस्त 2017

वीर शहीदों को नमन...

जिसका मुकुट हिमालय ,
पैरो को धोता सागर ।
विश्व-गुरु जो मार्ग दिखाए ,
खतरे में है उसका आँचल ।।


हत्यारा गजनी ने लुटा ,
भारत माँ के गहनों को ।
देश में बैठे जयचंदो ने ,
बेच दिया अस्मत मुगलो को ।।


व्यापारी बन आये इंग्लिश ,
पुर्त और फ्रांसीसी आये ।
पीठ में छुरा घोप हमारे,
कर दिया देश परतंत्र ।।


वीर शहीद जवानों ने,
आजादी के मतवालो ने ।
खून से सींचा आँचल माँ के ,
कर दिया देश स्वतंत्र ।।

द्वारा- अनुराग मिश्र

भारत का इतिहास बहुत ही कम शब्दों में
वीर शहीदों को नमन - जय हिंद
देश मे कितने आततायी अंग्रेज आये लेकिन भारत के संप्रभुता अखंडता को कुछ कर नही पाए। देश के शहीदों ने अपनी बलिदानी देकर देश को सुरक्षित किया। जय हिंद


यह स्वरचित रचना 15 अगस्त 2015 को लिखा था । भारत के इतिहास को कुछ चंद पंक्तियों में लिखने का एक छोटा प्रयास है। अगर समझ आ जाये तो शहीदों के नाम एक जय हिंद अवश्य लिखे।

जय हिंद ।।

शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

एक परिचय - आज की महिला

मित्रो मै एक छोटा प्रयास कर रहा हूँ , शायद कोई त्रुटि या भरी शब्द मिले तो .....माफ करना । इसी आशा और विश्वास के साथ मै अपनी बात शुरू करता हूँ। महिला , स्त्री , नारी और अंग्रेजी में " woman " मानव संस्कृति की एक महत्वपूर्ण अंग है । एक स्त्री को हम कई रूपों में जैसे की एक स्त्री - माँ के रूप में , बहन के रूप में , पत्नी के रूप में देख सकते है


"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता "
जहाँ नारी का सम्मान होता है वह सुख और समृधि का वास होता है , ऐसा हमारे पवित्र ग्रंथो कहा गया है नारी को देवी का प्रतीक भी मानते है

आज अख़बार और समाचार में सभी जगहों पर एक सबसे विशिष्ठ खबर होती है -
१. महिला अपने बच्चे के साथ खुदखुशी की ,(जली या नौवी माजिले से कूदी कर जान दी )
२. महिला के साथ सामूहिक बलात्कार या बलात्कार करने का प्रयास
३. दहेज़ के भूख की आग में जली " सीमा , सुधा और पता नही कितनी
४. माँ के कोख में भी नहीं बक्शा जा रहा है
ऐसी स्थिति हो गयी है , कि देश का ,समाज का पतन सुनिश्चित हो गया है आखिर वो भो तो किसी कि बहु ,बेटी और माँ होती है क्षमा करियेगा अधिक बलात्कार के मामलों में बलात्कारी समाज का नेता ,उसका कोई परिजन/ नजदीकी रिश्तेदार या बड़े पुलिस अधिकारी ( उनके परिजन) होते है जो कि समाज के रक्षक माने जाते है और खुद को साबित करने की फिराक में रहते है

कही से मुझे प्राप्त ये पंक्तिया बता रही है कि नारी के क्या रूप हो सकते है , माँ , बहु , बेटी या बहन होने के साथ साथ -

"तुमही दुर्गा, तुमही काली, तुम्हरी महिमा बड़ी निराली
तुमही गीता ,तुमही सीता , तुमसे मर्द न कउनउ जीता
तुम ही से घर मथुरा काशी , तुमही घर कि सत्यानाशी "

ज्यादा मै कुछ नही कहूँगा , यदि कुछ दिनों तक यही चलता रहा तो यही सीता और गीता ...दुर्गा और काली का रूप धारण कर लेगी और मथुरा काशी को छोड़ कर सत्यानाश का जो तांडव प्रस्तुत करेगी कि सम्पूर्ण सृष्टी का विनाश हो जायेगा


आप सभी मित्रो से, भाइयो से , बहनों से और माताओ से आखिर कब तक !!! अपने विचार कमेन्ट बॉक्स में अवश्य लिखे ।

क्या है प्राणायाम ???

प्राण का अर्थ है ऊर्जा। इस ऊर्जा से सारा स्थूल, भौतिक जगत हुआ है और इसी प्राण ऊर्जा से यह हमारा स्थूल शरीर भी हुआ है। अगर मनुष्य के शरीर में से एक सैल निकालकर माइक्रोस्कोप में रख कर देखो तो क्या दिखेगा। मॉस , अगर आप मॉस को फ़िर वापिस विघटित करें तो उसमे से निकलेगा एटम । विज्ञान कहता है कि उसमें से ऐसी ऊर्जा निकलेगी जो हमारी समझ के बाहर है।

प्राणायाम का अर्थ है अपनी - प्राणऊर्जा को विस्तारित करना । चीन में प्राण को ‘ ची ‘ कहते हैं । एक्युप्रेशर, एक्यूपंचर इसी ऊर्जा के आधार पर है। इनकी थ्योरी कहती है कि हमारे शरीर में मैरीडियन हैं, जिनमें ऊर्जा प्रवाहित हो रही है। जब जब यह ऊर्जा कहीं ब्लाक हो जाए, तब रोग होते हैं। अब अगर आप शरीर का चीर - फाड़ करके देखें तो ऐसी कोई मैरीडियन दिखेगी नहीं। परन्तु जिसे वह मैरीडियन कहते हैं या योग में जिसको नाड़ी कहते हैं , वह भौतिक नहीं है, वह स्थूल नहीं है ; बल्कि सूक्ष्म है।

हमारी एक नसें हैं जो स्थूल रूप में दिखाई पड़ रही हैं । पर दूसरी स्थूल प्रवाह की नसें हैं , जिसमे से प्राणऊर्जा दौड़ रही है। अब इसी प्राण के पाँच प्रकार हैं - अपान, व्यान, उदान, समान, प्राण। हमारा पूरा शरीर इसी प्राण के आधार पर चल रहा है। प्राण वायु का क्षेत्र कंठ नली से श्वास पटल के मध्य है, इसको यह प्राणवायु कंट्रोल करता है ।

अपान- नाभि के नीचे जितने अंग हैं, इनकी कार्य प्रणाली को अपानवायु नियंत्रित करता है। जो कुछ हम खाते हैं उसको पचाना और जो व्यर्थ है उसे मल - मूत्र के रूप में बाहर निकलना ; यह कार्य अपानवायु से संचालित होते हैं। अपान हमारे पाचनक्रिया को कंट्रोल करती है, जैसे गालब्लेडर, लिवर, छोटी आंत, बड़ी आंत ; ये सब इसी क्षेत्र में आते हैं।

उदान - कंठ के साथ जुड़े जितने भी अंग हैं; आँख, कान, नाक, जीभ, बोलना, स्वाद लेना; ये ज्ञानेन्द्रियाँ जो हैं, इनके सारे कार्य उदानवायु से होते हैं। जब तक उदानवायु है , तब तक आँखें देखेंगी, कान सुनेंगे, जीभ बोलेगी, नाक सूंघेगा। उदानवायु के द्वारा हमारी जो कर्मेन्द्रियाँ हाथ - पैर और नाभि के ऊपर के सारे अंग ; जैसे हृदय की धड़कन , हृदय की धमनियां आती हैं, फेंफडे यह सब उदान की शक्ति से कार्य करते हैं।

समान- यह हमारे शरीर के मध्य भाग में होती हैं। अपान और उदान की जो बैलेंसिंग है, यह समान वायु के द्वारा होती है। समान का कार्य बैलेंसिंग का है।

व्यान - यह प्राण हमारे पूरे शरीर में है। इसको हम सर्वव्यापी भी बोलते हैं। अर्थात जो पूरे शरीर में फैला हुआ है।
इन पंचप्राणों के भी पाँच उपप्राण हैं - जैसे हिचकी, आंखों का झपकाना, यह भी प्राण से हो रहा है।

अब प्राणायाम का सीधा सम्बन्ध इन्ही पंचप्राणों से है। पूरे शरीर का कार्य इन पंचप्राणों से हो रहा है और इन पंचप्राणों पर सीधा प्रभाव देता है- प्राणायाम।

प्राणायाम का मतलब सिर्फ़ श्वास को अन्दर-बाहर करना नहीं है, इसका सम्बन्ध सिर्फ़ श्वासों से नहीं है। बल्कि प्राणायाम का सम्बन्ध आपके शरीर में मौजूद इन पंचप्राणों से है और आप देखेंगे कि इन पंचप्राणों के ऊपर आपका कंट्रोल पूरा बन जाए । तब तुम्हारा दिल तब तक धड़केगा, जब तक तुम चाहोगे। अभी तो अचेतन मन से सारा कार्य हो रहा है हमारा मस्तिष्क, हमारा हृदय, ज्ञानेन्द्रियों के सारे कार्य उदानवायु के द्वारा कंट्रोल हो रहे हैं। उदान का क्षेत्र क्या है -इसकी समझ आती है प्राणायाम से।

अब प्राणायाम भी कई प्रकार के हैं, जिनमें से कुछ प्राणायाम ऐसे हैं, जिससे शरीर में उष्मा बढ़ाई जाती है। कुछ प्राणायाम ऐसे हैं जिससे शरीर में शीतलता बढ़ाई जाती है। कुछ ऐसे है जिससे मस्तिष्क की और श्वास की बैलेंसिंग की जाती है।

बहिरंग के बाद योग के अंतरंग साधन चार हैं। बहिरंग साधन - यम, नियम , आसन , प्राणायाम के बिना अंतरंग में प्रवेश नहीं हो सकता। जीवन में अस्तेय, सत्य , ब्रह्मचर्य नहीं है तो आसनों का कोई लाभ नहीं । संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर - प्रणिधान में गुरु भी समाहित है। ईश्वर या गुरु के बगैर इस मार्ग में प्रवेश सम्भव नहीं है। और इसकी अनुभूति के लिये संतोष, तप बहुत बड़े अस्त्र हैं। तो जब यह नियम का पालन करते हुए आसन करते हैं , तो हम आसन द्वारा अपने अन्नमय कोष, मनोमय कोष, प्राणमय कोष को भी प्रभावित कर सकते हैं।

हमारे शरीर के भीतर मौजूद स्त्राव - ग्रंथियों और कैमिकल के कारण हमारे मूड बनते हैं। इसका मतलब जब तुम्हें गुस्सा आया होता है तो गुस्से में भी तुम्हारे गुस्से का कारण तुम्हारा अशुद्ध शरीर है। अशुद्ध को मैं एक किनारे भी रख दूँ, तो भी मैं यह कहूँगी कि अशुद्ध मस्तिष्क है। इड़ा और पिंगला का बैलेंस नहीं है। सुषुम्ना तो क्या जागृत होगी, सत्य तो यह है कि इड़ा भी जागृत नहीं है। बायीं श्वास चलने का मतलब यह नहीं कि तुम्हारी इड़ा चल रही है। और दायीं चल रही हो तो इसका मतलब यह नहीं कि पिंगला चल रही है, क्योंकि इड़ा और पिंगला तो सुप्त हैं, जागृत नहीं हैं उनको भी जागृत करना पड़ता है। और इड़ा और पिंगला को जागृत करने के लिये आसन, प्राणायाम अत्यावश्यक हैं। जिनकी इड़ा जागृत हो, वह बहुत क्रियात्मक, रचनात्मक, बुद्धिमान, चिंतनशील , ग्रहणशील व्यक्ति होता हैं। जितने वैज्ञानिक होते हैं , इनकी इड़ा जागृत होती है। यह कोई छोटी बात नहीं है कि तुम कहो कि दायीं नासिका बंद कर बायीं चला लो और कहो कि इड़ा चल रही है , ऐसा नहीं है यह मूलाधारचक्र से प्रारम्भ हो कर आज्ञाचक्र पर समाप्त होती है, यह इड़ा का सूक्ष्ममार्ग है।


नाड़ी का अर्थ नसें नहीं है। नाड़ी का अर्थ है प्रवाह। मूलाधारचक्र से शुरू हो कर आज्ञाचक्र पर उसका समापन होता है। और इड़ा और पिंगला दोनों ही मूलाधार से प्रारम्भ हो कर आज्ञा तक पहुँचती हैं। एक तीसरी नाड़ी जिसे सुषुम्ना कहते हैं , यह भी आज्ञा तक आती है, इसीलिए आज्ञाचक्र को प्रयाग भी बोलते हैं। गंगा , यमुना , सरस्वती ; गंगा है - पिंगला। यमुना है - इड़ा और सरस्वती है सुषुम्ना।

बहार जो भौतिक प्रयाग हैं , यहाँ पर भी सरस्वती दिखाई नहीं पड़ती । परन्तु हिंदू ऐसा मानते हैं कि सरस्वती लुप्त है , अदृश्य है , पर बह रही है । जहाँ गंगा , यमुना , सरस्वती तीनो धारायें मिलती हैं , उसी को कहते हैं प्रयाग । तो एक यह भी प्रयाग है और एक हमारे भीतर प्रयाग है । जो भीतर प्रयाग है उसको कहते हैं आज्ञाचक्र ।

जिसकी पिंगला जागृत हो वह बहुत कर्मशील व्यक्ति होता है । कर्मशील व्यक्ति निष्काम कार्य करता है । वह कार्य को किसी अर्थ के लिए नहीं करता । अगर वह धन भी कमाएगा तो धन के पीछे भी उसकी धारणा समाज - कल्याण या देश - कल्याण के लिए होगी । जिसकी पिंगला जागृत हो वह एक कुशल राजनेता हो सकता है , योद्धा हो सकता है , एक राजनीतिज्ञ हो सकता है , आर्मी का जनरल हो सकता है । यह जो लोगों को प्रोमोशंस मिलते हैं , यह ऐसे ही नहीं मिल जाते । उनकी पिंगला जागृत होती है , उनकी पिंगला जागृत होई है इसलिये उनको यह तरक्कियां मिलती हैं । जिनकी पिंगला जागृत होती है उनके लिए प्रकृति ऐसे संयोजन खड़े कर देगी , इसीलिए उनकी उत्तरोत्तर उन्नति होती जाती है ।

जो लोग जीवन में उन्नत नहीं हो पाते, जो कर्मशील नहीं हैं, जो चिंतन - मननशील नहीं हैं ; मतलब यह कि शरीर जरुर उनका मनुष्य का है, पर उनकी न इड़ा जागृत है, न पिंगला। इसीलिए खाए - पीए, भोग, भजन और मृत्यु ; बस उनका जीवन इतना ही है ।
इसका अर्थ यह भी हुआ कि अगर साधक विशेष प्रयास करे और अपनी इड़ा और पीड़ा को जागृत करे , तो जो गुण उसके पास नहीं भी हैं , वे भी आ जायेंगे । इड़ा जागृत होगी तो तुम्हारा मस्तिष्क उन्नत हो जायेगा, चिंतनशील हो जायेगा और चिंतन - मनन वाले व्यक्ति अपने जीवन में बहुत से उपलब्धियों को प्राप्त करते हैं ।
कर्मशील व्यक्ति अपने जीवन में सम्मान और प्रतिष्ठा को पाते हैं । उनके लिए जीवन में एक उदेश्य होता है , तो उनकी बौद्धिक क्षमता विकसित होती है ।
जिसको हम मूर्ख कहते हैं, वह कौन व्यक्ति हैं ? जिनके मस्तिष्क का आधा हिस्सा सोया होता है । मस्तिष्क का तीन प्रतिशत हिस्सा तो साधारण लोगों का जगा होता है ।
जब आप आसन, यम, नियम, प्राणायाम अपने जीवन में लेकर आते हैं और प्रतिदिन इसका अभ्यास करते हैं , अगर छ: महीने से एक साल तक बराबर श्रद्धा भाव से शरीर का शुद्धिकरण करते हुए नेति, प्रक्षालन , कुंजल करते रहें तो जीवन में प्रत्याशित उन्नति दिख जायेगी ।
जिनकी इड़ा और पिंगला जागृत होगी, उन्ही के सुषुम्ना के जागृत होने की सम्भावना बनेगी । जिनकी ये तीनो जागृत हैं , वही चक्रों का अनुसंधान कर सकेगा । और जो चक्रों का अनुसंधान करेगा, उसी के कुंडलिनी जागरण हो सकेगा । और जब कुंडलिनी मूलाधार से उठ कर मणिपुर , अनाहद , विशुद्ध , आज्ञा इत्यादि चक्रों का भेदन करती हुई सहस्त्रार तक पहुँचती है , तब यहीं पर पहली सविकल्प समाधि घटित होती है ।
अपना उद्धार अगर चाहते हो तो तुम्हें यह बात समझ लेनी चाहिए कि ज्ञान सुना - सुनाया मात्र कुछ सूचनायें हैं, जो थोड़ी देर के लिए तुम्हें रस देती हैं । लेकिन उसके बाद तुम्हारे किसी काम की नहीं। वर्षों से सत्संग सुन रहें है, लेकिन सुनना तो बस कानों तक ही गया जीवन का रूपांतरण तो हुआ ही नहीं ।
ज्ञान का प्रतिफलन भी उन्ही को होता है, जिनमें विवेक, वैराग्य, मुमुक्षता, सत्संग आदि गुण होते हैं । जिनमे यह चारों गुण नहीं होते, उनको सिर्फ़ एक अभिमान होता है कि हम ज्ञान सुनते हैं, हमें सब पता है। लेकिन अपने चित्त के, अपने मन के साक्षी तो तुम हो । तो यम, नियम, आसन, प्राणायाम अगर विधिवत् ढंग से अगर जीवन में आए…….. अगर केवल प्राणायाम के साथ ही गहरी दोस्ती हो जाए तो आटोमैटिकली जो योग कि पांचवी अवस्था है उसमें प्रवेश हो ही जायेगा, वह है प्रत्याहार ।

अंत में निष्कर्षतः प्राणायाम सिर्फ इन तीन क्रियायो का संयोग है और जो भी है वो उसके प्रकार है ....

1.पूरक:- अर्थात नियंत्रित गति से श्वास अंदर लेने की क्रिया को पूरक कहते हैं।
2.कुम्भक:- अंदर की हुई श्वास को क्षमतानुसार रोककर रखने की क्रिया को कुम्भक कहते हैं।
3.रेचक:- अंदर ली हुई श्वास को नियंत्रित गति से छोड़ने की क्रिया को रेचक कहते हैं।

बुधवार, 5 अप्रैल 2017

प्रथम मधुर मिलन ...

विता के परिपेक्ष्य में:-

जब एक नव-विवाहिता अपने ससुराल जाती है और रात्रि की पहली मिलान बेला आती है तो उस नाव-युवती के हाव भाव क्या होते है ? उसका प्रथम पंक्ति में विवरण है और दूसरी पंक्ति में उसके आंतरिक हाव्-भाव एवम मिलान का वर्णन है


वो अक्षत यौवना, रात्रि पहर ,
वो मकरंदो से भरी हुई।
कातिल नैन और लाल अधर ,
शर्मो में लिपटी छुई -मुई।।

मन में उठती उद्वेग लहर ,
वो सकुचाई और सिमट गई।
नैनन स्नेह और हुई निडर ,
भौरे से मिली और पिघल गई।।

नव यौवन के पहले मिलने का कुछ शब्दों में संजोने का छोटा सा प्रयास किया है। इसमें प्रियतम अपने प्रेमी से पहले मिलन पर क्या हाव भाव देती है उसका अलंकृत वर्णन है ।।
मधुर मिलन


निवेदन :-
इस पद्य में कम शब्दो में बहुत कुछ लिखने का प्रयास किया है और विद्वानों से निवेदन है कि इसकी व्याख्या करे और किसी भी त्रुटि के लिए सुझाव आमन्त्रित है




मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

जल का संरक्षण

सूखा , वर्षा, त्रासदी , पानी के सब मूल ।
जल का दोहन न करे , प्रकृति होगी प्रतिकूल ।।

प्रकृति होगी प्रतिकूल ,पड़ेगा भयंकर सूखा ।
वन, पक्षी और मानव , बूँद बूँद को तरसा ।।

कहत कवी अनुराग , जल का करो संरक्षण ।
प्रकृति होगी खुशहाल , सबका होगा रक्षण ।।